कारण:
पेशाब को ज्यादा देर तक रोकने से पेट में गैस बनती है जो पेशाब में घात पैदा करती है। आयुर्वेद के अनुसार यह 13 भेद की है। यह रोग प्रमेह के कारण भी होता है।
लक्षण:
पेशाब में घात आने के रोग में पेशाब या तो रुक-रुक कर थोड़ा आता है या बिल्कुल ही बंद हो जाता है, फिर भी सुजाक रोग की तुलना में मूत्रघात रोग में पेशाब करते समय तकलीफ कम होती है। इसके अलावा रोगी बूंद-बूंद करके पेशाब आना, पेशाब में खून का आना, मूत्राशय का फूलना, पेट फूलना, नाभि के नीचे या पेड़ू के मुंह पर गांठ का बन जाना, पेशाब गाढ़ा आना, तेज दर्द होना और पेशाब में बदबू आना आदि मूत्रघात के लक्षण माने जाते हैं।
भोजन तथा परहेज:
नारिकेल, खजूर, फल, दूध ओर दही का सेवन मूत्राघात के रोगी के लिये फायदेमंद होता है।
विभिन्न औषधियों से उपचार-
1. कबूतर: कबूतर की बीट को पीसकर गर्म करके पेड़ू पर लेप करके बांध दें। इसके ऊपर से बकरी के बालों को गर्म पानी में भिगोकर सिंकाई करने से पेशाब में घात का आना बंद हो जाता है।
2. कटेरी: कटेरी के रस में छाछ मिलाकर छानकर पीने से मूत्रघात का रोग दूर हो जाता है।
3. गोखरू: गोखरू के पंचांग (जड़, तना, फल, फूल, पत्ती) का काढ़ा बनाकर उसमें शहद और मिश्री मिलाकर पीने से मूत्राघात और सुजाक दोनों ही रोगों में लाभ होता है।
4. जंगली प्याज: एक चौथाई ग्राम से 1 ग्राम तक जंगली प्याज खाने से पेशाब की रुकावट दूर हो जाती है।
5. शोरा: शोरा में कपड़े का टुकड़ा भिगोकर नाभि के नीचे बांधने से मूत्रघात में लाभ होता है।
6. पुनर्नवा: दूध में पुनर्नवा के पत्तों का रस मिलाकर पीने से पेशाब में आने वाला घात या धातु रुक जाती है।
7. शहतूत: शहतूत के रस में कलमीशोरा को पीसकर नाभि के नीचे लेप करने से पेशाब की रुकावट दूर होती है।
8. त्रिफला: त्रिफला के काढ़े में गुड़ और दूध मिलाकर पीने से पेशाब का घात रोग खत्म हो जाता है।
9. गेंदे का रस: गेंदे का रस पीने से पेशाब के संग आने वाला घात ठीक हो जाता है।
10. कुलंजन: कुलंजन को पानी में पीसकर पीने से मूत्राघात का रोग दूर हो जाता है।
11. केसर :
पुराने घी में केसर को मिलाकर पीने से पेशाब की रुकावट में लाभ
घी के साथ केसर को मिलाकर खाने से मूत्रघात का रोग नहीं होता है।
12. ककड़ी: मूत्रघात में 10 ग्राम ककड़ी के बीज और 10 ग्राम सेंधानमक को पीसकर कांजी मिलाकर पीने से मूत्रघात खत्म होता है।
13. जवाखार: जवाखार, इलायची और फिटकरी को बराबर मात्रा में लेकर कूटकर और पीसकर रख लें। इस चूर्ण में शहद मिलाकर सुबह-शाम 3 ग्राम की मात्रा में खाने से पेशाब खुलकर आता है और पेशाब में घात का आना भी बंद हो जाता है।
14. मूली :
4 ग्राम मूली के बीजों को सिल पर रखकर बारीक पीसकर लगभग 300 से 400 मिलीलीटर पानी में छानकर पीने से पेशाब की जलन दूर पेशाब खुलकर आता है।
मूली को पीसकर उसमें थोड़ा-सा कलमीशोरा मिलाकर नाभि पर लेप करने से रुका हुआ पेशाब खुलकर आता है।
कोमल मूली के पत्तों के रस में शोरा डालकर नाभि पर लेप करने से पेशाब में धातु का आना (मूत्राघात) बंद हो जाता है।
मूली के पत्तों के लगभग 500 मिलीलीटर रस में 3 ग्राम कलमीशोरा मिलाकर पीने से पेशाब शीघ्र ही खुलकर आता है।
15. विदारीकन्द: विदारीकन्द, सरिवा, गुर्च, हल्दी, वायबिडंग, पंच तृण और पंचमूल को पीसकर पीने से मूत्रकृच्छ और पेशाब से निकलने वाला घात दूर होता है।
16. मेहंदी: 5 से 10 ग्राम मेहंदी के पत्ते के स्वरस में थोड़ा पानी और मिश्री मिलाकर पीने से वीर्य का बहना बंद हो जाता है।
17. आक: आक के दूध में बबूल की छाल का थोड़ा सा रस मिलाकर नाभि के आसपास और पेड़ू पर लेप करने से मूत्राघात (पेशाब में धातु का जाना) का रोग दूर हो जाता है।
18. छोंकर: छोंकर के फूलों के रस में दूध मिलाकर गर्म कर लें। इसके बाद इसमें जीरा और चीनी डालकर पीने से पेशाब के साथ धातु का आना बंद हो जाता है।
19. आंवला: 5-6 आंवलों को पीसकर नलों पर लेप करने से मूत्राघात मिटता है।
20. मूसलीकन्द: 14 से 28 मिलीलीटर मूसली का काढ़ा, 4 मिलीलीटर तिल का तेल, 5 ग्राम घी तथा 100 मिलीलीटर दूध को एक साथ मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करनें से मूत्राघात के रोग में लाभ होता है।
21. कांकड़: कांकड़ की पत्तियों का रस जीरे और मिश्री के साथ सेवन करने से मूत्राघात का रोग दूर हो जाता है।
22. कपूर: अगर पेशाब बंद हो गया हो तो लिंग के आगे के छेद में कपूर का टुकड़ा या पानी में पीसकर उसमें भिगोये गये कपड़े की बत्ती रखने से बंद पेशाब खुलकर आता है।
23. कायफल: कायफल के पेड़ की छाल और नारियल का रस एकसाथ मिलाकर 7 दिन तक पीने से पेशाब में धातु का आना समाप्त हो जाता है।
24. कुंदरू: कडवे कंदरू की जड़ का काढ़ा पीने से पेशाब के साथ धातु का निकलना बंद हो जाता है।
25. अनार:
लगभग 50 ग्राम अनार के रस में छोटी इलायची के बीजों का चूर्ण और सोंठ का चूर्ण आधा-आधा ग्राम की मात्रा में मिलाकर पीने से मूत्राघात के रोग में बहुत लाभ होता है।
अनार के रस में छोटी इलायची के बीज और सौंठ का चूर्ण मिलाकर पीने से मूत्राघात का रोग कुछ ही समय में समाप्त हो जाता है।
10 ग्राम अनार के पत्ते और 10 ग्राम हरा गोखरू को 150 मिलीलीटर पानी में पीसकर और छानकर सेवन करने से मूत्राघात की शिकायत दूर हो जाती है।
26. अंकोल: 5 ग्राम अंकोल के फल का गूदा और 4 ग्राम तिलों का क्षार 2 चम्मच शहद में मिलाकर दही के पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करने से मूत्राघात का रोग मिट जाता है।
27. इलायची: इलायची के दाने और सेंकी हुई हींग के लगभग आधा ग्राम चूर्ण को घी और दूध के साथ सेवन करने से पेशाब में धातु का आना बंद हो जाता है।
28. अर्जुन: मूत्राघात अर्थात् पेशाब में रूकावट होने पर अर्जुन की छाल को कूटकर 2 कप पानी के साथ उबालें। जब आधा कप पानी शेष बचे, तो उसे छानकर रोगी को 2-3 बार पिलाने के बाद पेशाब खुलकर आने लगता है।
मूत्रघात पेशाब में धातु (सफेद द्व्य पदार्थ ) आने का घरेलू नुस्खा
गुलाब की पंखुड़ी से बढाये कामोत्तेजना
गुलाब की पंखुड़ियों
गुलाब में कई तरह के औषधीय गुण मौजूद है और गुलाब एक कामोत्तेजक भी हैं। गुलाब का इस्तेमाल कई प्रकार के सौंदर्य उत्पादों में किया जाता है। इसका इस्तेमाल एक पाचन के रूप में भी किया जा सकता है। गुलाब में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण रक्त वाहिकाओं में सुधार करता है और जननांग में रक्त का प्रवाह बढ़ता है।
तुलसी के बीजों से करें सेक्स समस्याओं का इलाज
देसी घरेलू नुस्खे -तुलसी के बीजों से करें सेक्स समस्याओं का इलाज
"जब भी तुलसी के पौधों में लगी मंजिरियों को उनके पकने पर ही तोड़ लेना चाहिए वरना कीड़ों की वजह से ये खराब हो जाते हैं। अब इनमें से काले काले बीजों को अलग करके रख लें। इसे सब्जा कहते हैं। अगर आपके घर के लगे पौधे में ये नहीं लग पाते हैं तो बाजार में पंसारी या आयुर्वैदिक दवाईयो की दुकानों से खरीद लें। अब इन सब्जा का इस्तेमाल निम्न समस्याओं के लिए नीचे दिए गए तरीकों के द्वारा करें। शीघ्र पतन व वीर्य की कमी शीघ्र पतन व वीर्य की कमी की समस्या का अचूक इलाज है सब्जा। इन समस्याओं के निदान के लिए रोज रात को 5 ग्राम तुलसी के बीज गर्म दूध के साथ लें। दस दिन में असर दिखने लगेगा। अनियमित मासिक धर्म अगर मासिक धर्म की अनियमितता की समस्या है तो इन बीजों का इस्तेमाल करें। इसी के साथ इस दौरान होने वाले पेट दर्द का इलाज भी इन बीजों के सेवन से ठीक हो जाता है। इसके लिए केवल पीरियड होने के दिन से पीरियड रहने तक तुलसी के बीज सुबह-शाम 5-5 ग्राम पानी या दूध के साथ लें। अनियमित मासिक की समस्या और पेट दर्द की समस्या ठीक हो जाएगी। नपुंसकता इन बीजों में नपुंसकता जैसी लाइलाज बीमारी का भी इलाज छुपा है। इससे यौन शक्ति में भी बढ़ोतरी होती है और सभी तरह की यौन दुर्बलता की भी समस्या खत्म हो जाती है। इसके लिए 15 ग्राम तुलसी के बीज और 30 ग्राम सफेद मुसली लेकर चूर्ण बनाएं, फिर उसमें 60 ग्राम मिश्री पीसकर मिला दें। और शीशी में भरकर रख दें। 5 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें इससे यौन दुर्बलता दूर होती है।"
प्रोटीन के जबरदस्त स्वास्थ्य लाभ स्रोत & प्रोटीन की आवश्यकता
परिचय-
भोजन का मुख्य आवश्यक तत्व है- प्रोटीन। यही तत्व शरीर की कोशिकाओं अर्थात् मांस आदि का निर्माण करता है। इसकी प्रचुर मात्रा भोजन में रहने से शरीर की कोशिकाओं का निर्माण और मरम्मत आदि का कार्य सुचारू रूप से जीवन भर चलता रहता हैं। प्रोटीन में कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन तथा गंधक के अंश मिले रहते हैं। इसमें फास्फोरस भी विद्यमान हो सकता है। प्रोटीन में नाइट्रोजन की अधिकता रहती है। प्रोटीन दो प्रकार का होता है (1) पशुओं से प्राप्त होने वाला (2) फल, सब्जियों तथा अनाज आदि से मिलने वाला। हालांकि शरीर में यदि प्रोटीन अधिक हो जाए तो मल द्वारा बाहर निकल आता है। फिर भी दैनिक आवश्यकता के लिए नियमित प्रोटीन की आवश्यकता शरीर को रहती है लेकिन इस बात की ओर भी ध्यान देना अति आवश्यक है कि आवश्यकता से अधिक प्रोटीन लाभ की अपेक्षा शरीर को हानि भी पहुंचा सकता है परन्तु जब भोजन के बाद भी शरीर में प्रोटीन की कमी हो जाए तो बाहर से कृत्रिम तरीके से निर्मित प्रोटीन से उस कमी की पूर्ति करना बहुत जरूरी होता हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार प्रति किलोग्राम वजन के अनुपात से मनुष्य को एक ग्राम प्रोटीन की आवश्कता होती हैं अर्थात यदि वजन 50 किलो है तो नित्य 50 ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है। प्रोटीन शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार के भोजन में मौजूद पाया जाता है। यदि दोनों को भोजन में एक साथ लिया जाए तो शरीर में प्रोटीन की प्रचुर मात्रा शामिल की जा सकती है। चिकित्सा वैज्ञानिकों ने सिद्ध कर दिया है कि शरीर में जीवनीय तत्वों की कमी न हो तो शरीर रोगों से बचा रहता है। संक्रमणजन्य रोगों से बचाव के लिए प्रोटीन की अधिक आवश्यकता होती है।
प्रोटीन के स्रोत-
अण्डे की सफेदी, दूध, दही, पनीर, मछली, मांस, यकृत, वृक्कों और दिमाग में सर्वोत्तम किस्म की प्रोटीन विद्यमान है। दालों, हरी सब्जियों और अनाजों में दूसरे किस्म का प्रोटीन पाया जाता है।
अंडे में प्रोटीन
क्र.स.
अंडा
प्रोटीन
1.
पूर्ण अंडा
13.0 प्रतिशत
2.
अंडे की सफेदी
10.5 प्रतिशत
3.
अंडे की जर्दी
17.0 प्रतिशत
दूध में प्रोटीन
क्र.स.
प्राणी का नाम
प्रोटीन
1.
गाय का दूध
3.4 प्रतिशत
2.
बकरी का दूध
4.4 प्रतिशत
3.
भेड़ का दूध
6.7 प्रतिशत
4.
भैंस का दूध
5.9 प्रतिशत
5.
स्त्री का दूध
1.7 प्रतिशत
प्रोटीन की आवश्यकता
बच्चों को प्रोटीन की अधिक आवश्यकता होती है क्योंकि उनका शरीर विकास कर रहा होता है।
बुढ़ापे में भी शरीर को प्रोटीन की अत्यधिक आवश्यकता होती है क्योंकि यह एक ऐसी अवस्था होती है जब प्रोटीन जल्दी हजम हो जाता है। इस आयु में यदि प्रोटीन की मात्रा घट गई तो जीवन शक्ति का अभाव हो जाता है। इसलिए इस अवस्था में खाद्य पदार्थों में प्रोटीन की मात्रा बढ़ा देनी चाहिए।
गर्भावस्था में मां के साथ-साथ गर्भ में पल रहे बच्चे को भी प्रोटीन की अत्यधिक आवश्यकता होती है। प्रोटीन गर्भ में पल रहे बच्चे की शरीर के विकास में जरूरी होती है। फिर मां के स्वास्थ्य के लिए तो यह जरूरी है ही। प्रोटीन की कमी इस अवस्था में मां और गर्भ में पल रहे बच्चे के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकती है। अत: यह अति आवश्यक है कि गर्भावस्था में माता को प्रोटीनयुक्त खाद्य अधिक से अधिक प्रयोग कराया जाए।
जिस प्रकार गर्भावस्था में माता को प्रोटीन की अधिक आवश्यकता होती है। ठीक उसी प्रकार दूध पिलाने वाली माता को भी प्रोटीन की आवश्यकता होती है। इस अवस्था में प्रोटीन की कमी मां और बच्चा दोनों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। दूध पिलाने वाली माताओं और गर्भवती स्त्री को दोनों प्रकार के प्रोटीन देने चाहिए।
रोगों के बाद रोगी के शरीर की शक्ति क्षीण हो चुकी होती है। इस अवस्था में रोगी दीन-हीन व असहाय हो जाता है। रोगी के शरीर के तंतु, कोशिकाएं आदि काफी टूट-फूट चुके होते हैं अत: उन्हें नई जीवन शक्ति और मजबूती प्रदान करने की खातिर अधिकाधिक दोनों प्रकार के प्रोटीन देने चाहिए ताकि शरीर की खोई हुई शक्ति को पुन: प्राप्त कर सके। जिन लोगों को रोगों के बाद या ऑप्रेशन के बाद उचित खाद्य प्रोटीन नहीं मिलते उनके पुन: रोगी हो जाने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। रोगी का शरीर पहले ही रोग से टूट चुका होता है। उसके बाद खान-पान सही नहीं होने से शरीर की शक्ति और अधिक तेजी से नष्ट होती है और रोग दुबारा आ घेरता है।
बरगद के जबरदस्त घरेलू नुस्खे मचा देंगे बिस्तर पर धमाल
देसी घरेलू नुस्खे -बरगद के जबरदस्त घरेलू नुस्खे मचा देंगे बिस्तर पर धमाल
"बड़े से छायादार बरगद का पेड़ आपमें से हर किसी ने देखा होगा। आपने इसमें लगने वाले छोटे-छोटे फल भी देखे होंगे। इसकी जड़ों की लताओं को पकड़ कर आपने खूब झूला भी झूला होगा। लेकिन आज तक इसका इस्तेमाल कभी नहीं किया होगा जैसे घर में नीम, आम, गुलाब आदि का करते हैं। ऐसे में आपने बचपन में भी कभी सोचा होगा और अब भी सोचते होंगे की इसका क्या इस्तेमाल किया जाता है? तो आज हम आपको बताते हैं कि ये क्या कमाल करता है। हम शर्त लगाते हैं कि अगर आपको एक बार इसका फायदा पता चल गया तो आपको इससे ज्यादा उपयोगी पेड़ कोई और नहीं लगेगा। कई लोगों को होती है स्वपनदोष, शीघ्रपतन आदि की समस्या। जिसके लिए लोग लगाते हैं हकीमों और चिकित्सकों के चक्कर। इन चक्करों को छोड़िए और बरगद के लाल फल खाइए। बरगद के फल सेक्स संबंधी सारी समस्याएं ठीक कर देता है। गुप्त रोग दूर करे बरगद का ये फल पौरुष शक्ति बढ़ाने के साथ कई सारे गुप्त रोग भी ठीक कर करता है। इसका इस्तेमाल करने से शीघ्र पतन, स्वपनदोष, कमजोरी, प्रमेह, वीर्य का पतलापन और वीर्य संबंधी अन्य सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं। साथ ही ये सेक्स से संबंधी हर तरह की समस्या को दूर करता है। पौरुष शक्ति बढ़ाए बरगद का सबसे ज्यादा इस्तेमाल पौरुष शक्ति बढ़ाने के लिए किया जाता है। जहां अधिकतर लोग पौरुष शक्ति बढ़ाने के लिए वियाग्रा जैसी महंगी दवाई का इस्तेमाल करते हैं वहीं गांव में अब भी लोग बरगद के फल का इस्तेमाल करते हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि वियाग्रा के कई सारे साइडइफेक्ट भी होते हैं जबकि बरगद के इस फल का कोई साइडइफेक्ट भी नहीं होता। लो मोबीलिटी की समस्या ठीक करे पिछले कई सालों में पुरुषों में लो मोबिलिटी की समस्या काफी सामने आ रही है। इस समस्या में पुरुषों का स्पर्म महिला के शरीर में ज्यादा दिन तक रह नहीं पाता जिससे महिलाओं को गर्भधारण करने में समस्या होती है। साथ ही इस कारण कई बार पुरुषों को शीघ्रपतन की भी समस्या होती है। ऐसे में लोग विवाहित जीवन का भरपूर आनंद नहीं ले पाते। इस समस्या के उपचार के लिए लोग बड़े-बड़े हकीमों और चिकित्सकों से इलाज कराते हैं। लेकिन कोई परिणाम नहीं निकलता। जबकि इस समस्या के लिए बरगद का फल बड़ा कारगर है। इसका इस्तेमाल बहुत ही सस्ता और चमत्कारिक परिणाम देने वाला है। ये तुरंत स्पर्म की क्वांटिटी और क्वालिटी में बढ़ोतरी करता है जिससे आप अपने वैवाहिक जीवन का भरपूर आनंद उठा पाते हैं। इसका इस्तेमाल स्पर्म की बीमारी और कमजोरी से ग्रस्त रोगियों के लिए रामबाण इलाज है इस्तेमाल करने का तरीका बरगद का फूल काम शक्तिवर्धक और शुक्रावर्धक गुण से भरपूर है। बरगद के पेड़ में बेर की तरह छोटे-छोटे लाल फल लगते हैं। इन फलों को तोड़ें। जमीन पर गिरने ना दें। फिर इन फलों को जमीन में कपड़ा बिछाकर छाया में सुखाएं। फिर सुखे हुए फलों को पत्थर में पीसकर पाउडर बना लें। सुखाते या पीसते समय लोहे का इस्तेमाल बिल्कुल भी ना करें। इन फलों को लोहे के संपर्क में बिल्कुल भी ना लाएं। अब इस पाउडर में इसी के तोल के बराबर पीसी हुई मिश्री मिला लें। अब इस पीसी हुई मिश्री और बारगद के फल के पाउडर को मिट्टी के बर्तन में सुरक्षित रखें। अब हर रोज सुबह-शाम दूध के साथ एक-एक चम्मच इस पाउडर मिश्रण को खाएं। इससे शीघ्र पतन की समस्या ठीक हो जाएगी और काम शक्ति की इच्छा प्रबल हो जाएगी जिससे इंसान वैवाहिक जीवन का भरपूर आनंद उठा पाएगा। इन बीमारियों का करता है इलाज शीघ्र पतन स्वपनदोष काम वासना में कमी काम की अनिच्छा वीर्य का पतलापन वीर्य के अन्य विकार कमजोर स्पर्म"
बबूल के जबरदस्त स्वास्थ्य लाभ जानकर आपके होश उड़ जाएंगे
देसी घरेलू नुस्खे - बबुल के जबरदस्त स्वास्थ्य लाभ जानकर आप के होश उड़ जाएंगे
बबूल या कीकर के फूल ग्रीष्म ऋतु में आते हैं और फल शरद ऋतु में आते हैं . दांतों को स्वस्थ रखने के लिए इसकी दातुन बहुत अच्छी मानी जाती है . मसूड़े फूल गये हों तो इसकी पत्तियां चबाकर मालिश करने के बाद थूक दें . इससे मुंह के छाले भी ठीक होते हैं .
प्रमेह रोगों में इसकी कोमल पत्तियां प्रात:काल चबाकर निगल लें . ऊपर से पानी पी लें . इसकी फलियों को पकने से पहले सुखाकर पावडर बनाकर रख लें . इस पावडर का नियमित रूप से सेवन करने से सभी तरह की कमजोरी दूर होती हैं . टांसिल बढ़े हुए हों , या गायन में परेशानी हो रही हो तो इसकी पत्तियां +छाल उबालकर उसमें नमक मिलाकर गरारे करें . कफ , बलगम ,एलर्जी की समस्या हो तो इसकी छाल +लौंग +काली मिर्च +तुलसी को मिलाकर काढ़ा बनाकर पीयें .
lever की समस्या है तो इसकी फलियों का पावडर +मुलेठी +आंवला मिलाकर , काढ़ा बनाकर पीयें . Colitis या amoebisis होने पर कुटज +बबूल की छाल का काढ़ा लें . Periods की समस्या हो तो कीकर की छाल का काढ़ा पीयें