कैंसर को घटाता है विटामिन की गोलीयां करें इनका इस्तेमाल

देसी घरेलु नुस्खे - विटामिन से घटता है कैंसर का खतरा?

कैंसर की बीमारी का इलाज ढूँढने में चिकित्सा जगत के लोग बरसों से लगे हुए हैं. अमरीका के शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर रोज़ मल्टीविटामिन की एक गोली ली जाए तो पुरुषों में कैंसर होने के आसार कम हो जाते हैं.

ये अध्ययन एक दशक के दौरान 50 साल से ऊपर वाले 15 हज़ार पुरुषों पर किया गया.

शोध जर्नल ऑफ़ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन में छपा है. शोध के मुताबिक विटामिन की गोलियाँ लेने वाले पुरुषों में कैंसर के मामलों में थोड़ी कमी आई है.

हालांकि विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि कुछ अन्य अध्ययनों में इसका उल्टा पाया गया है और फलों-सब्ज़ियों वाली डाइट ज़्यादा फायदेमंद हो सकती है.

आमतौर पर सेहत के लिए मल्टीविटामिन के फायदे मिलेजुले बताए गए हैं.

फायदा या नुकसान ?

कुछ अध्ययन बताते हैं कि जब सेहतमंद लोग मल्टीविटामिन लेते हैं तो इससे फायदे के मुकाबले नुकसान ज़्यादा होता है जबकि कुछ लोगों को कैंसर में इससे कोई मदद नहीं मिली.

ब्रिटेन में हर साल मल्टीविटामिन लेने वाले हज़ार लोगों में से 17 को कैंसर था. जबकि डमी दवाइयाँ लेने वाले एक हज़ार लोगों में से 18 को कैंसर था.

शोधकर्ता डॉक्टर हॉवर्ड बताते हैं, “कई अध्ययन ये संकेत देते हैं कि अगर आप पोषक खाना खाएँगे तो कैंसर होने के आसार कम हो जाएँगे. अब हमें ये भी पता चल गया है कि रोज़ मल्टीविटामिन लेने से भी कैंसर के उम्रदराज़ पुरुष मरीज़ों में फर्क पड़ सकता है.”

अध्ययनकर्ताओं को ये नहीं पता कि महिलाओं या युवाओं पर मल्टीविटामिन क क्या असर होगा.

लेकिन ब्रिटेन में कैंसर रिसर्च संस्थान में काम करने वाली हेल्गा मानती हैं कि बहुत से अध्ययन यही बताते हैं कि विटामिन की दवा लेने से कैंसर को रोका नहीं जा सकता- विटामिन का कैंसर पर कोई असर नहीं होता या कभी कभी खतरा बढ़ भी जाता है.



मुंहासे को ठीक करने का घरेलु नुस्खा

देसी घरेलु नुस्खे - मुँहासे और मुँहासे ब्लेमिशेस कभी कभी जीवन भर सकररिंग पीछे छोड़ रहा है, आपकी त्वचा पर कहर को खत्म कर सकते हैं. किशोरों के बीच आम हालांकि, मुँहासे उम्र विशेष नहीं है और आप के रूप में अच्छी तरह से एक वयस्क के रूप में मुँहासे से पीड़ित हो सकता है. गर्भवती, मासिक धर्म, और रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में भी इस अवधि के दौरान हार्मोनल बदलाव के कारण मुँहासे से पीड़ित हो सकता है.
मुँहासे के कारणों. त्वचा के नीचे वसामय ग्रंथियों सीबम, त्वचा की लोच मोइस्चरिजे करने और बनाए रखने में मदद करता है कि एक तेल या स्नेहक का उत्पादन. बालों के रोम के कारण सीबम और मृत त्वचा कोशिकाओं के उत्पादन से अधिक को रोकना है, जब मुँहासे व्हीटहेड्स या ब्लैकहेड्स के रूप में प्रकट होता है.

कुछ मामलों में, त्वचा के जीवाणु संक्रमण मुँहासे में परिणाम हो सकता है. गंभीर मामलों में, मुँहासे सूजन या मवाद और फार्म अल्सर से संक्रमित हो सकते हैं. आमतौर पर, मुँहासे एक समय में या समूहों में चेहरे पर दिख सकता है. तुम भी अन्य तेल वापस गर्दन जैसे क्षेत्रों,, कंधे और छाती पर मुँहासे मिल सकता है. सबसे मुँहासे समय के साथ गायब हो सकता है, मुँहासे घावों दोनों शारीरिक और भावनात्मक रूप से निशान सकते हैं. कई किशोर आत्म सम्मान की समस्याओं और साथियों के दबाव से लड़ाई. मौखिक और सामयिक दवाओं मुँहासे और निशान का इलाज करने का दावा करते हैं, आप कुछ साइड इफेक्ट से पीड़ित हो सकता है और दवा के परिणाम दिखाना शुरू करने के लिए एक लंबा समय लग सकता है. अध्ययन आहार और जीवन शैली मुँहासे flares को कम करने में एक बड़ी भूमिका निभाते हैं दिखा. ऐसे परिदृश्य में, प्राकृतिक स्रोतों मदद मुँहासे कमी विटामिन कर सकते हैं? लड़ाकू मुँहासे मदद कर सकते हैं?

विटामिन ए और मुँहासे. विटामिन ए मुँहासे अनुसंधान के लिए मौखिक और सामयिक उपयोग के लिए विटामिन ए की खुराक और कई विटामिन ए आधारित मुँहासे दवाओं में हुई है. हालांकि, विटामिन ए अपने विरोधी मुँहासे संपत्तियों के लिए लोकप्रियता हासिल की है कारण इस विटामिन की आवश्यक कार्यों में निहित है. विटामिन ए को बढ़ावा देता है और स्वस्थ त्वचा को बनाए रखता है. यह भी अपने हार्मोन को विनियमित करने और एक हार्मोनल संतुलन को बनाए रखने के लिए आवश्यक है. डॉक्टरों रजोनिवृत्ति के दौर से गुजर रहे हैं, जो महिलाओं, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं, और महिलाओं के मासिक धर्म, किशोरों के लिए विटामिन ए की उचित सेवन की सलाह देते हैं. शरीर इन बार के दौरान हार्मोनल परिवर्तन की प्रक्रिया के रूप में, यह मुँहासे में परिणाम हो सकता है क्योंकि यह है. विटामिन ए भी सेल उत्थान के लिए आवश्यक है और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए. विटामिन ए की पर्याप्त सेवन बैक्टीरिया और वायरस है कि हमले सफेद रक्त कोशिकाओं के विकास को प्रोत्साहित कर सकते हैं. हम मृत त्वचा कोशिकाओं के साथ खामियों को दूर पोर्स मुँहासे का कारण है कि पता है. उभरते पढ़ाई विटामिन ए की पर्याप्त सेवन त्वचा कोशिकाओं के अनुचित बहा बचने और भरा हुआ पोर्स के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है दिखाते हैं.

एक मुँहासे उपचार विटामिन. इन निष्कर्षों के आधार पर, विटामिन ए कई मुँहासे उपचार उत्पादों में एक घटक के रूप में उभरा है. हालांकि, अध्ययन भी अपने आहार के माध्यम से या विटामिन ए की खुराक के माध्यम से या तो बड़ी मात्रा में विटामिन ए लेने त्वरित या प्रभावी परिणाम की गारंटी नहीं होगी कि प्रकट करते हैं. आप की खुराक लेने के लिए या अपने दैनिक आहार में परिवर्तन करता है इसलिए, इससे पहले अपने चिकित्सक या त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श करें. विटामिन ए की अधिक खपत प्रसव के दौरान मतली, दोष के कारण जाना जाता है, और लंबे समय तक जिगर की क्षति है. एक के आधार पर एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए विटामिन ए की सिफारिश की मात्रा 2000 कैलोरी आहार 900 मिलीग्राम है. यहाँ आप अपने पोषण की आवश्यकता को पूरा करने में मदद कर सकते हैं कि खाद्य पदार्थों की एक सूची है:

• जैसे ब्रोकोली, गोभी और पालक के रूप में हरी पत्तेदार सब्जियों,
, जैसे गाजर, आलू, कद्दू के रूप में • पीला या नारंगी खाद्य पदार्थ
• उष्णकटिबंधीय आम और पपीता जैसे फल, और
• मांस और चिकन से जिगर, दूध और पनीर और अंडे जैसे डेयरी उत्पादों.

कई मौखिक और सामयिक मुँहासे दवाओं उनके घटक सूची के भाग के रूप में, रेटिनॉल, विटामिन ए के व्युत्पन्न का दावा है. रेटिनॉल या इसके ऑक्सीकरण फार्म, रेटिनोइक एसिड, कोशिकाओं और हार्मोन के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. आप रेटिनोल आधारित दवा का उपयोग मनन, तो पहले अपने चिकित्सक या त्वचा विशेषज्ञ से बात करें. इन मुँहासे दवाओं के कई मजबूत सामग्री शामिल हो सकते हैं और आप अपने साइड इफेक्ट के बारे में पता होना चाहिए.

 परीक्षा के तनाव से बचने के उपाय  


रातों रात बढायें सेक्स पावर और बनें बिस्तर के बादशाह

कौंच के बीज सेक्स पावर बढ़ाने के लिए वरदान
माने जाते हैं। इसके कुछ दिनों का सेवन करने
से ही कमजोरी, नामर्दी, ढीलापन और शीघ्रपतन
जैसी समस्याएं बहुत जल्दी दूर होती है। इतना ही
नहीं बल्कि कौंच के बीजों का सेवन करने से पुरुष
अधिक शक्तिशाली भी होते हैं। कौंच के बीजों का
सेवन मसल्स बढ़ाने और वजन बढ़ाने के लिए भी
किया जाता है।

कैसे करें इस्तेमाल
कौंच बीजों का सेवन करने के लिए इन्हें कुछ देर
दूध या पानी में भिगोएं उसके बाद इनका छिलका
उतार कर धूप में सुखा दें। सूखने के बाद बीजों को
बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। इसे रोजाना सुबह और
शाम को मिश्री या दूध के साथ लें। आप सेक्शुअली
खुद को संतुष्ट महसूस करेंगे। कौंच के बीजों के चूर्ण
को दूध के साथ उबाल कर पीने से भी कमजोरी दूर
होती है। कौंच के बीजों के साथ उड़द की दाल, गेंहू,
चावल और शतावरी को मिक्स कर दूध के साथ उबालें

इसे ठण्डा करके रोज रात को सेवन करें।
नामर्दी की समस्या कुछ दिनों में ही सही हो जाएगी।
सेक्स पावर बढ़ाने के साथ ही कौंच के बीजों का सेवन
करने से तनाव और चिंता भी दूर होती है। इसके
नियमित सेवन से भी ग्रंथियां मजबूत होती है और
तंत्रिका तंत्र के लिए ये पोषक तत्वों का काम
करती हैं। जिन लोगों को कोलेस्ट्रॉल और शुगर
की समस्या है उनके लिए कौंच के बीज रामबाण हैं।

सेक्स पावर बढ़ाने में रातों रात असर करते हैं कौंच के बीज।
तनाव और चिंता भी दूर करते हैं ये बीज।
नियमित सेवन से पुरुषों में ताकत भी आती है।



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मूत्रघात पेशाब में धातु (सफेद द्व्य पदार्थ ) आने का घरेलू नुस्खा



कारण:
पेशाब को ज्यादा देर तक रोकने से पेट में गैस बनती है जो पेशाब में घात पैदा करती है। आयुर्वेद के अनुसार यह 13 भेद की है। यह रोग प्रमेह के कारण भी होता है।

लक्षण:
पेशाब में घात आने के रोग में पेशाब या तो रुक-रुक कर थोड़ा आता है या बिल्कुल ही बंद हो जाता है, फिर भी सुजाक रोग की तुलना में मूत्रघात रोग में पेशाब करते समय तकलीफ कम होती है। इसके अलावा रोगी बूंद-बूंद करके पेशाब आना, पेशाब में खून का आना, मूत्राशय का फूलना, पेट फूलना, नाभि के नीचे या पेड़ू के मुंह पर गांठ का बन जाना, पेशाब गाढ़ा आना, तेज दर्द होना और पेशाब में बदबू आना आदि मूत्रघात के लक्षण माने जाते हैं।

भोजन तथा परहेज:
नारिकेल, खजूर, फल, दूध ओर दही का सेवन मूत्राघात के रोगी के लिये फायदेमंद होता है।

विभिन्न औषधियों से उपचार-

1. कबूतर: कबूतर की बीट को पीसकर गर्म करके पेड़ू पर लेप करके बांध दें। इसके ऊपर से बकरी के बालों को गर्म पानी में भिगोकर सिंकाई करने से पेशाब में घात का आना बंद हो जाता है।

2. कटेरी: कटेरी के रस में छाछ मिलाकर छानकर पीने से मूत्रघात का रोग दूर हो जाता है।

3. गोखरू: गोखरू के पंचांग (जड़, तना, फल, फूल, पत्ती) का काढ़ा बनाकर उसमें शहद और मिश्री मिलाकर पीने से मूत्राघात और सुजाक दोनों ही रोगों में लाभ होता है।

4. जंगली प्याज: एक चौथाई ग्राम से 1 ग्राम तक जंगली प्याज खाने से पेशाब की रुकावट दूर हो जाती है।

5. शोरा: शोरा में कपड़े का टुकड़ा भिगोकर नाभि के नीचे बांधने से मूत्रघात में लाभ होता है।

6. पुनर्नवा: दूध में पुनर्नवा के पत्तों का रस मिलाकर पीने से पेशाब में आने वाला घात या धातु रुक जाती है।

7. शहतूत: शहतूत के रस में कलमीशोरा को पीसकर नाभि के नीचे लेप करने से पेशाब की रुकावट दूर होती है।

8. त्रिफला: त्रिफला के काढ़े में गुड़ और दूध मिलाकर पीने से पेशाब का घात रोग खत्म हो जाता है।

9. गेंदे का रस: गेंदे का रस पीने से पेशाब के संग आने वाला घात ठीक हो जाता है।

10. कुलंजन: कुलंजन को पानी में पीसकर पीने से मूत्राघात का रोग दूर हो जाता है।

11. केसर :

पुराने घी में केसर को मिलाकर पीने से पेशाब की रुकावट में लाभ
घी के साथ केसर को मिलाकर खाने से मूत्रघात का रोग नहीं होता है।

12. ककड़ी: मूत्रघात में 10 ग्राम ककड़ी के बीज और 10 ग्राम सेंधानमक को पीसकर कांजी मिलाकर पीने से मूत्रघात खत्म होता है।

13. जवाखार: जवाखार, इलायची और फिटकरी को बराबर मात्रा में लेकर कूटकर और पीसकर रख लें। इस चूर्ण में शहद मिलाकर सुबह-शाम 3 ग्राम की मात्रा में खाने से पेशाब खुलकर आता है और पेशाब में घात का आना भी बंद हो जाता है।

14. मूली :

4 ग्राम मूली के बीजों को सिल पर रखकर बारीक पीसकर लगभग 300 से 400 मिलीलीटर पानी में छानकर पीने से पेशाब की जलन दूर पेशाब खुलकर आता है।
मूली को पीसकर उसमें थोड़ा-सा कलमीशोरा मिलाकर नाभि पर लेप करने से रुका हुआ पेशाब खुलकर आता है।
कोमल मूली के पत्तों के रस में शोरा डालकर नाभि पर लेप करने से पेशाब में धातु का आना (मूत्राघात) बंद हो जाता है।
मूली के पत्तों के लगभग 500 मिलीलीटर रस में 3 ग्राम कलमीशोरा मिलाकर पीने से पेशाब शीघ्र ही खुलकर आता है।

15. विदारीकन्द: विदारीकन्द, सरिवा, गुर्च, हल्दी, वायबिडंग, पंच तृण और पंचमूल को पीसकर पीने से मूत्रकृच्छ और पेशाब से निकलने वाला घात दूर होता है।

16. मेहंदी: 5 से 10 ग्राम मेहंदी के पत्ते के स्वरस में थोड़ा पानी और मिश्री मिलाकर पीने से वीर्य का बहना बंद हो जाता है।

17. आक: आक के दूध में बबूल की छाल का थोड़ा सा रस मिलाकर नाभि के आसपास और पेड़ू पर लेप करने से मूत्राघात (पेशाब में धातु का जाना) का रोग दूर हो जाता है।

18. छोंकर: छोंकर के फूलों के रस में दूध मिलाकर गर्म कर लें। इसके बाद इसमें जीरा और चीनी डालकर पीने से पेशाब के साथ धातु का आना बंद हो जाता है।

19. आंवला: 5-6 आंवलों को पीसकर नलों पर लेप करने से मूत्राघात मिटता है।

20. मूसलीकन्द: 14 से 28 मिलीलीटर मूसली का काढ़ा, 4 मिलीलीटर तिल का तेल, 5 ग्राम घी तथा 100 मिलीलीटर दूध को एक साथ मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करनें से मूत्राघात के रोग में लाभ होता है।

21. कांकड़: कांकड़ की पत्तियों का रस जीरे और मिश्री के साथ सेवन करने से मूत्राघात का रोग दूर हो जाता है।

22. कपूर: अगर पेशाब बंद हो गया हो तो लिंग के आगे के छेद में कपूर का टुकड़ा या पानी में पीसकर उसमें भिगोये गये कपड़े की बत्ती रखने से बंद पेशाब खुलकर आता है।

23. कायफल: कायफल के पेड़ की छाल और नारियल का रस एकसाथ मिलाकर 7 दिन तक पीने से पेशाब में धातु का आना समाप्त हो जाता है।

24. कुंदरू: कडवे कंदरू की जड़ का काढ़ा पीने से पेशाब के साथ धातु का निकलना बंद हो जाता है।

25. अनार:

लगभग 50 ग्राम अनार के रस में छोटी इलायची के बीजों का चूर्ण और सोंठ का चूर्ण आधा-आधा ग्राम की मात्रा में मिलाकर पीने से मूत्राघात के रोग में बहुत लाभ होता है।
अनार के रस में छोटी इलायची के बीज और सौंठ का चूर्ण मिलाकर पीने से मूत्राघात का रोग कुछ ही समय में समाप्त हो जाता है।
10 ग्राम अनार के पत्ते और 10 ग्राम हरा गोखरू को 150 मिलीलीटर पानी में पीसकर और छानकर सेवन करने से मूत्राघात की शिकायत दूर हो जाती है।

26. अंकोल: 5 ग्राम अंकोल के फल का गूदा और 4 ग्राम तिलों का क्षार 2 चम्मच शहद में मिलाकर दही के पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करने से मूत्राघात का रोग मिट जाता है।

27. इलायची: इलायची के दाने और सेंकी हुई हींग के लगभग आधा ग्राम चूर्ण को घी और दूध के साथ सेवन करने से पेशाब में धातु का आना बंद हो जाता है।

28. अर्जुन: मूत्राघात अर्थात् पेशाब में रूकावट होने पर अर्जुन की छाल को कूटकर 2 कप पानी के साथ उबालें। जब आधा कप पानी शेष बचे, तो उसे छानकर रोगी को 2-3 बार पिलाने के बाद पेशाब खुलकर आने लगता है।


गुलाब की पंखुड़ी से बढाये कामोत्तेजना

गुलाब की पंखुड़ियों



गुलाब में कई तरह के औषधीय गुण मौजूद है और गुलाब एक कामोत्तेजक भी हैं। गुलाब का इस्‍तेमाल कई प्रकार के सौंदर्य उत्पादों में किया जाता है। इसका इस्‍तेमाल एक पाचन के रूप में भी किया जा सकता है। गुलाब में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण रक्त वाहिकाओं में सुधार करता है और जननांग में रक्त का प्रवाह बढ़ता है।



तुलसी के बीजों से करें सेक्स समस्याओं का इलाज

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देसी घरेलू नुस्खे -तुलसी के बीजों से करें सेक्‍स समस्‍याओं का इलाज

"जब भी तुलसी के पौधों में लगी मंजिरियों को उनके पकने पर ही तोड़ लेना चाहिए वरना कीड़ों की वजह से ये खराब हो जाते हैं। अब इनमें से काले काले बीजों को अलग करके रख लें। इसे सब्जा कहते हैं। अगर आपके घर के लगे पौधे में ये नहीं लग पाते हैं तो बाजार में पंसारी या आयुर्वैदिक दवाईयो की दुकानों से खरीद लें। अब इन सब्जा का इस्तेमाल निम्न समस्याओं के लिए नीचे दिए गए तरीकों के द्वारा करें। शीघ्र पतन व वीर्य की कमी शीघ्र पतन व वीर्य की कमी की समस्या का अचूक इलाज है सब्जा। इन समस्याओं के निदान के लिए रोज रात को 5 ग्राम तुलसी के बीज गर्म दूध के साथ लें। दस दिन में असर दिखने लगेगा। अनियमित मासिक धर्म अगर मासिक धर्म की अनियमितता की समस्या है तो इन बीजों का इस्तेमाल करें। इसी के साथ इस दौरान होने वाले पेट दर्द का इलाज भी इन बीजों के सेवन से ठीक हो जाता है। इसके लिए केवल पीरियड होने के दिन से पीरियड रहने तक तुलसी के बीज सुबह-शाम 5-5 ग्राम पानी या दूध के साथ लें। अनियमित मासिक की समस्या और पेट दर्द की समस्या ठीक हो जाएगी। नपुंसकता इन बीजों में नपुंसकता जैसी लाइलाज बीमारी का भी इलाज छुपा है। इससे यौन शक्ति में भी बढ़ोतरी होती है और सभी तरह की यौन दुर्बलता की भी समस्या खत्म हो जाती है। इसके लिए 15 ग्राम तुलसी के बीज और 30 ग्राम सफेद मुसली लेकर चूर्ण बनाएं, फिर उसमें 60 ग्राम मिश्री पीसकर मिला दें। और शीशी में भरकर रख दें। 5 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें इससे यौन दुर्बलता दूर होती है।"